Wednesday, September 14, 2011

Born !Before 2ist of July

And then there was a knock.
On the door .On the heart .
With an effort of will he got up,
peeped out ......uncertain .
It was a shadow .....
and not a pale one,
not of a former self,
but, resplendent,
a streak from remembered rainbows.
Those smiling eyes,
that  quirk of an eyebrow,
a question in the way she stood.....
He stepped aside,
allowed her in .....silent..
An answer in his teardrop.....

Friday, September 9, 2011

Curtains........

Hiding;
hiding behind an arras,
a dissembling of faith,
I sensed them; those
daughters of flesh,
them bodies of love ....
Supine,stretched
on the rack of youth,
they,
cavorting, gifting
a life-time ,a fullness away.......
And ,manifest ,now,
I feel one shadow,
one panting heart
twice broken,shaft-pierced,
a cloven  mirror, reflecting ,
all at once,
a waning  moon,
a fading me ........

Wednesday, August 3, 2011

तुम पुकार लो ......A sonnet for These Times.

तेरे आशियाँ से मेरा घर
था करीब लेकिन हर डगर
जो चली थी उस जहान से
मेरी हसरतों के मकान से ;
कहीं पास आ के मुड गयी
किसी और राह से जुड गयी,
कहा कि "इतनी गुरबतें !
क्या करूंगी एसी कुरबतें ?"
में सुन रहा था यह सदा
वही काफ़िर और वही अदा,
इसी जिंदगी के सवाल पर
दिल-ए- वीरां के इसी हाल पर ;
तेरी रह-गुज़र को सलाम कर
हर ख्वाब तेरे नाम कर,
चंद अश्क बस लुटा के में
तेरा अक्स फिर मिटा के में ;....
लौटा हूँ आज फिर ,इक दिन तमाम करके
वही टूटे हुए सपने अब कल के नाम करके ..........

Tuesday, August 2, 2011

मेरे आंसूंओं में न मुस्कुरा ......

तेरे आंसूओं से जुदा जुदा
तेरी नम पलक से अलग-अलग
तेरे दिल की हर इक तशनगी
तेरी चाहतों में सुलग-सुलग ;
इक मोड यूँ ही था मुड गया
लगा ...इधर भी तू ही है
तेरे आशियाँ की हर डगर
इक कहकशां का सफर तो है;
जब इस वहम की छाँव में
जब गैर के दर-ओ-बाम में
वोह प्यार अजनबी लगा
वोह दयार अजनबी लगा ;
दिल ने कहा कि यार सुन
चल फिर हसीं सा ख्वाब बुन
पलट जा , जा पलट भी जा
है वही सदा ,वही सी धुन ;
तो लगा कि तू तो पास है
बस यूँ ही थोड़ी उदास है
मेरे यार ,चल अब छोड़ दे
इस राह को फिर इक मोड दे ;
क्यूंकि आज कांधा उदास है
तेरे आंसूओं कि प्यास है,
तू रो ले , पर मुस्कुरा तो दे
बुझे शोलों को हवा तो दे,
आंख नम है तो चल नम सही
यह जिगर तो मेहवेआस है ........

Sunday, June 26, 2011

The Castaway.

Yes:There were they,
just sailing through,
a reflection ,a flare,
a war-dance away.
They:bit players, strumming
 a rhapsody of faith,
a litany of loss,
and,the dirge
of  a doleful giving -in.
And I ,
a bare-clad lad,
eyes welling over,
turned, lonely, inwards,
a real-life Crusoe,
said `yes' to my island,
feeding brooding swallows,
and weary,
just waved them away....

The Sea-shore

Floating far ,far above
the good-bye moment,
looking, longing ,
at retracting waters
of receding dreams ,
I smile.....sand in my shoes:
Take in the splashy spray,
the flume of colours,
the beading bubbles,
the empty sea-shell--
now a promise----
of a virginal pearl,
and ,bending,
lovingly trace
the soft contours
of an unwashed name........

Tuesday, June 21, 2011

बस

कभी कभी मुझे लगता है कि बस जी भी चुकें ......

खत्म हों यह सिलसिले रूठ जाने के
निपट लें दास्ताने फिर मनाने की
किसी आगोश में दम भर सिमटने की तड़प
रुख -ए-रोशन के आईने में संवर जाने की ;
खत्म हो मेरी मीना,जाम हों खाली
सब्र हो मुझे अपनी अदम सी प्यास के साथ
न कोई नज़र , न नज़र  में नज़ारे ही हसीं
न आज गुज़रे मेरा आज कल की आस के साथ;
खत्म हो यह स्याही ,सूख जाए कलम
न हाथ जुम्बिद ,न लब पे आह सी हो
न कोई देख सके फिर अजब सी चाहत से
न अंधेरों से नुमाया इक नई राह सी हो ;

कभी कभी मुझे लगता है कि बस जी भी चुकें.....